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गर्भावस्था में बुखार के कारण और घरेलू उपचार | Pregnancy Me Fever …

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Pregnancy Me Fever Aana

Image: Shutterstock

गर्भावस्था के दौरान बुखार होने पर उसे गंभीरता से लेना जरूरी है। ध्यान रहे कि प्रेग्नेंसी में बैक्टीरिया या वायरस के कारण बुखार होने पर मां और नवजात दोनों के लिए स्थिति गंभीर हो सकती है। बोस्टन विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में पाया गया है कि जिन महिलाओं ने गर्भावस्था से ठीक पहले या शुरुआत में बुखार होने की रिपोर्ट की थी, उनके नवजात शिशुओं में ‘न्यूरल ट्यूब दोष’ की आशंका अधिक पाई गई थी (1)। ‘न्यूरल ट्यूब दोष’ मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी से जुड़ा जन्म दोष है, जो गर्भावस्था के पहले महीने में हो सकता है (2)।

वहीं, दूसरी ओर संयुक्त राज्य अमेरिका की सीडीसी (सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन) ने गर्भवती महिलाओं में एच1एन1 इन्फ्लूएंजा वायरस (H1N1 Influenza) की गंभीर जटिलताओं के बारे में एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें एक मामला मौत का भी था। इस रिपोर्ट के अनुसार गर्भवती महिलाओं और भ्रूण को एच1एन1 इन्फ्लूएंजा वायरस होने का खतरा अधिक रहता है। सिरदर्द, खांसी के साथ बुखार को एच1एन1 वायरस के सामान्य लक्षणों में गिना जाता है (3)।

मॉमजंक्शन के इस लेख में हमारे साथ जानिए गर्भावस्था और बुखार के बीच संबंध और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों के बारे में।

सबसे पहले हम बुखार के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

क्या है बुखार?

जब शरीर का तापमान सामान्य से अधिक हो, तो उसे बुखार कहा जाता है। प्रत्येक व्यक्ति का सामान्य तापमान एक-दूसरे से अलग हो सकता है, लेकिन वैज्ञानिक तौर पर इसे करीब 98.6 फारेनहाइट माना गया है। एक बात तो स्पष्ट है कि बुखार कोई बीमारी नहीं है। यह संकेत है कि आपका शरीर किसी बीमारी या संक्रमण से लड़ने की कोशिश कर रहा है (4)।

क्या बुखार आना गर्भावस्था का संकेत है?

बुखार गर्भावस्था का संकेत हो सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि ओव्यूलेशन (अंडाशय से अंडे निकलने की प्रक्रिया) के दौरान शरीर के तापमान में वृद्धि होती है, जिसे बेसल बॉडी टेम्परेचर (BBT) कहा जाता है। अगर तय तारीख से दो हफ्ते बाद तक पीरियड्स न आएं और ओव्यूलेशन के दौरान बेसल बॉडी टेम्परेचर ज्यादा रहे, तो यह गर्भावस्था का संकेत हो सकता है (5)।

इस प्रकार बीबीटी के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि महिला अपने गर्भधारण के प्रारंभिक चरण में पहुंच गई है।

गर्भावस्था में बुखार आने के कारण | Garbhavastha me Bhukar Aana

गर्भावस्था में प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है, क्योंकि इसे मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त काम करना पड़ता है। इस दौरान, शरीर अतिसंवेदनशील हो जाता है और संक्रमण से ग्रसित हो सकता है, जो बुखार का कारण बन सकता है। नीचे दिए जा रहे बिंदुओं के माध्यम से जानिए गर्भावस्था के दौरान बुखार का कारण बनने वाले कुछ अन्य कारणों के बारे में –

1. सर्दी-जुकाम

गर्भावस्था के दौरान सर्दी-जुकाम से बुखार हो सकता है। इस दौरान बहती नाक, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। अगर यह समस्या ज्यादा दिन तक जारी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें (5), (6)।

2. इंफ्लुएंजा

गर्भावस्था में प्रतिरक्षा प्रणाली, हृदय और फेफड़ों में परिवर्तन होता है। इसलिए, गर्भवती महिलाओं को फ्लू होने पर बुखार होने व अन्य कोई गंभीर बीमारी होने का खतरा रहता है (7)।

3. मूत्रमार्ग संक्रमण (UTI)

गर्भावस्था के दौरान महिलाएं यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की चपेट में आ सकती हैं। यह मूत्र मार्ग में होने वाला संक्रमण है, जिसमें पेशाब के साथ खून आता है, ठंड लगती है और बुखार भी हो जाता है। यह गर्भावस्था के दौरान आम समस्या नहीं है, लेकिन इसका खतरा बना रहता है (8)।

4. गैस्ट्रोएन्टराइटिस वायरस

जब गैस्ट्रोएन्टराइटिस वायरस शरीर पर हमला करता है, तो यह उल्टी, दस्त और बुखार जैसे लक्षणों के साथ आता है। यह समस्या एक गर्भवती महिला को भी हो सकती है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं (9) (10)।

5. पार्वो वायरस बी19

सीडीसी के अनुसार, केवल पांच प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को यह दुर्लभ संक्रमण होता है। सामान्य संकेतों में त्वचा पर रैशेज, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश और बुखार शामिल हैं। पार्वो वायरस बी19 के कारण भ्रूण को एनीमिया और दिल में सूजन व गर्भपात जैसी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है (11)।

6. लिस्टेरिया

लिस्टरियोसिस तब होता है जब आप दूषित पानी और भोजन लेते हैं। तेज बुखार, मतली, मांसपेशियों में दर्द, दस्त, सिरदर्द व गले में ऐंठन इसके आम लक्षण हैं। अगर इसका जल्द उपचार न किया जाए, तो इससे समय से पहले प्रसव, जन्म के समय बच्चे की मौत या फिर गर्भपात जैसी गंभीर जटिलताएं सकती हैं (12)।

प्रेग्नेंसी में बुखार आने से बच्चे पर प्रभाव

प्रेग्नेंसी के दौरान बुखार न सिर्फ मां के लिए, बल्कि बच्चे के लिए भी घातक साबित हो सकता है। नीचे दिए गए बिंदुओं के माध्यम से जानिए गर्भावस्था के दौरान बुखार किस प्रकार शिशु पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है-

  • भ्रूण के विकास में बाधा – गर्भावस्था के दौरान हाइपरथर्मिया (असामान्य रूप से शरीर का तापमान बढ़ना) गर्भपात का खतरा बन सकता है, क्योंकि इसकी पहचान टेटरोजेनिक के रूप में की गई है। टेराटोजेन के कारण भ्रूण या भ्रूण के विकास में बाधा आ सकती है। गर्भावस्था के दौरान बुखार, विशेष रूप से जन्मजात विकृतियों के साथ जुड़ा हुआ है (13)।
  • ओरल क्लीफ का खतरा – एक अध्ययन के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान बुखार होने से शिशुओं में ओरल क्लीफ (ऊपरी होंठ का नाक के संपर्क में आना) का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, एंटीपायरेटिक्स (बुखार को कम करने की दवा) का उपयोग इसके हानिकारक प्रभाव को कम कर सकता है (14)। इस दवाई का सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करें।
  • जन्म दोष की आंशका – सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के एक अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं को शुरुआती गर्भावस्था के दौरान या उससे ठीक पहले सर्दी या फ्लू के साथ बुखार आता है, उनके नवजात शिशु में जन्म दोष की आंशका बढ़ जाती है (6)।
  • न्यूरल ट्यूब दोष – स्लोन एपिडेमियोलॉजी केंद्र (बोस्टन विश्वविद्यालय) ने गर्भावस्था से पहले या उसके दौरान महिलाओं को हुए बुखार पर अध्ययन किया है। इसके जरिए पता चला है कि जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान बुखार था, उनके नवजात शिशुओं में ‘न्यूरल ट्यूब दोष’ की आशंका अधिक पाई गई थी (1)।
  • ऑटिज्म और बच्चे का विकास प्रभावित – एक अध्ययन से इस बात की पुष्टि की गई है कि गर्भावस्था के दौरान बुखार होने पर बच्चे का विकास प्रभावित होता है और ऑटिज्म की समस्या हो सकती है। ऑटिज्म के कारण बच्चे को बातचीत करने में समस्या होती है (15)।

गर्भावस्था के दौरान बुखार से कैसे निपटें

गर्भावस्था के दौरान बुखार आ सकता है, इसके लिए आप ज्यादा परेशान न हों। घर में एक थर्मामीटर जरूर रखें और अपने तापमान की जांच करते रहें। अगर यह शरीर के सामान्य तापमान (98.6 F) से बहुत ज्यादा है, तो आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। आप शुरुआत में निम्नलिखित सामान्य तरीके अपनाकर बढ़ते बुखार को कम कर सकती हैं।

  • आरामदायक और ढीले-ढाले कपड़े पहनें। सूती कपड़े आपके लिए ज्यादा उचित रहेंगे। अगर आपको ठंड लग रही है, तो आप चादर या कंबल ओढ़ सकते हैं।
  • आप गुनगुने पानी से स्नान कर सकती हैं। इससे शरीर का तापमान कुछ हद तक कम हो सकता है।
  • इस दौरान हाइड्रेट रहना बहुत जरूरी है। बीच-बीच में पानी पीते रहें।
  • जितना हो सके शरीर को आराम दें। बुखार के कारण आपको चक्कर भी आ सकते हैं, इसलिए ज्यादा चले-फिरे नहीं।
  • बुखार को कम करने के लिए गर्म या ठंडा पैक लगाएं। आप दवा की दुकानों पर उपलब्ध गर्म और ठंडा पैक खरीद सकती हैं।

गर्भावस्था में बुखार की दवाएं | Pregnancy Me Fever Ki Medicine

गर्भावस्था के दौरान बुखार से निपटने के लिए आप कुछ चुनिंदा दवाएं ले सकती हैं। नीचे जानिए कौन सी दवाएं आपके लिए सही रहेंगी (16), (17)–

  • बुखार के लिए कई दवाइयां बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन कुछ ही गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित मानी जाती हैं। आमतौर पर डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामोल देते हैं। डॉक्टर की परामर्श पर आप इसकी खुराक ले सकती हैं।
  • एस्पिरिन या इबुप्रोफेन जैसे नॉन-स्टेरायडल एंटी इंफ्लेमेटरी (NSAIDs) दवाइयां भी डॉक्टर की बताई गई मात्रा के अनुसार ली जा सकती है।
  • सर्दी और फ्लू निवारक गोलियों में कोडीन पाया जाता है। डॉक्टर की सलाह पर आप गर्भावस्था के दौरान इसे ले सकती हैं।

अच्छा होगा कि आप सही दवा के चुनाव के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें, क्योंकि बिना डॉक्टर की सलाह पर दवा का सेवन आपके और आपके बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है।

गर्भावस्था के दौरान बुखार को कम करने के घरेलू उपाय

गर्भावस्था के दौरान बुखार को कम करने के लिए आप प्राकृतिक उपाय अपना सकती हैं। हर्बल दवाएं, आधुनिक दवाइयों से कारगर होती हैं और इनके दुष्प्रभाव भी न के बराबर होते हैं। नीचे जानिए कुछ चुनिंदा घरेलू उपाय, जो आपको गर्भावस्था के दौरान आए बुखार से निजात दिला सकते हैं।

  1.  तुलसी की चाय – गर्भावस्था के दौरान कई तकलीफों को दूर करने के लिए तुलसी का सेवन किया जाता है। बुखार होने पर एक कप पानी में तुलसी के चार-पांच पत्तों को दो-तीन मिनट तक उबालें और हल्का ठंडा होने पर पिएं। तुलसी का एंटी फीवर गुण आपको बुखार से निजात दिलाने का काम करेगा (18), (19)।
  1. अदरक और शहद – गर्भावस्था के दौरान बुखार को कम करने के लिए आप अदरक और शहद का प्रयोग कर सकते हैं। आधा चम्मच कटे हुए अदरक को एक कप पानी में डालें और पांच मिनट तक अच्छी तरह उबालें और हल्का ठंडा होने पर एक चम्मच शहद मिलाकर पिएं। अदरक और शहद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से समृद्ध होते हैं, जो आपको बुखार से निजात दिलाने में मदद करेंगे (20), (21)।
  1. मेथी का पानी – गर्भावस्था के दौरान बुखार से निजात पाने के लिए आप मेथी के दानों को प्रयोग में ला सकती हैं। इसके लिए आप एक कप पानी में एक चम्मच मेथी के दानों को डालकर रातभर के लिए रख दें और सुबह पानी को छानकर पिएं। गर्भावस्था के दौरान मेथी का सेवन सुरक्षित माना जाता है (22)।
  1. हल्दी का सेवन- गर्भावस्था में बुखार को कम करने के लिए आप हल्दी का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं। हल्दी शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है और बुखार को कम करती है। आप एक गिलास पानी में आधा चम्मच हल्दी, अदरक पाउडर और आवश्यकतानुसार चीनी डालकर गर्म करें। मिश्रण के हल्का ठंडा होने पर धीरे-धीरे पिएं (23)।
  1. पर्याप्त जल – गर्भावस्था के दौरान बुखार को कम करने के लिए आप बीच-बीच में पानी पीते रहें, ताकि आप पूरी तरह हाइड्रेट रहें।

गर्भावस्था के दौरान अन्य प्रकार के बुखार और सावधानियां

बुखार से निजात दिलाने वाले प्राकृतिक उपायों के बाद नीचे जानिए गर्भावस्था के दौरान अन्य प्रकार के बुखार और उनसे जुड़ी सावधानियां।

  1. टाइफाइड – प्रेग्नेंसी के दौरान टाइफाइड आपको चपेट में ले सकता है (24)। यह एक प्रकार का संक्रमण है, जो दूषित भोजन और पानी से फैलता है। टाइफाइड के लक्षण पैराटाइफाइड बुखार की तरह ही होते हैं। कमजोरी, पेट में दर्द, सिरदर्द, दस्त व खांसी आदि इसके आम लक्षण हैं (25)। गर्भावस्था के दौरान इस प्रकार का बुखार मां और होने वाले बच्चे के लिए खतरा बन सकता है। अगर आपको गर्भावस्था के दौरान इन लक्षणों में से कोई भी महसूस होता है, तो आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। सावधानी के लिए बाहर का भोजन बंद कर दें।
  1. परागज बुखार – इसे एलर्जिक राइनाइटिस भी कहा जाता है। यह सर्दी-जुकाम के लक्षणों के साथ दस्तक देता है, जैसे – बहती नाक, आंखों में खुजली, नाक बंद व साइनस का दबाव आदि (26)। यह बुखार वायरस की वजह से नहीं होता, बल्कि दूषित वातावरण से होने वाली एलर्जी से होता है।

सावधानी के लिए आप ज्यादा घर से न निकलें। अगर बाहर निकलें, तो सनग्लास लगाएं और नोज मास्क का इस्तेमाल करें। इसके रोकथाम के लिए अपने से कोई दवाई न लें। बेहतर इलाज के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

  1. वायरल – गर्भावस्था के दौरान वायरल भी हो सकता है। यह एक प्रकार का बुखार है, जो इंफ्केशन की वजह से होता है। ठंड लगना, पसीना आना, डिहाइड्रेशन, शरीर में दर्द, कमजोरी आदि इसके आम लक्षण हैं। गर्भावस्था के दौरान वायरल संक्रमण शरीर में प्रवेश कर सकता है, जो मां और होने वाले बच्चे के लिए खतरा बन सकता है (27)।
  1. सर्दी-जुकाम से बुखार – गर्भावस्था के दौरान आपको सर्दी-जुकाम हो सकता है, क्योंकि इस दौरान शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोरगर्भावस्था के दौरान डेंगू बुखार के जोखिम क्या हैं? हो जाती है (5)। सर्दी-जुकाम के कारण बुखार भी हो सकता है। बुखार के साथ सिरदर्द, थकान, गले में दर्द व खराश भी हो सकती है। अगर आप प्रेग्नेंसी के दौरान ऐसी स्थिति से गुजरती हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। हालांकि, आप कुछ सावधानियों का खुद से पालन कर सकती हैं, जैसे पानी पीने की मात्रा बढ़ा दें, ज्यादा से ज्यादा आराम करें और अगर आपकी नाक बंद है, तो गर्म पानी की भाप लें।
  1. डेंगू – मादा एडीज इजिप्टी (Aedes Aegypti Mosquito) मच्छर के काटने से डेंगू वायरस शरीर में दस्तक देता है। इसका खतरा ज्यादातर बरसात के मौसम में रहता है। गंदगी के कारण मच्छर आकर्षित होते हैं। गर्भावस्था के दौरान भी डेंगू वायरस आपको चपेट में ले सकता है। यह वायरस गर्भावस्था के दौरान कई मेडिकल समस्याओंं का कारण बन सकता है, जैसे – समय से पूर्व लेबर, प्री-एक्लेमप्सिया (उच्च रक्तचाप), सी-सेक्शन का जोखिम, फेटल ट्रांसमिशन आदि (28)। इसलिए, इसका उपचार करने में जरा भी कोताही न बरतें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल :

गर्भावस्था के दौरान परागज बुखार (Hay fever) के लिए उपचार क्या है?

परागज बुखार प्रतिकूल वातावरण से होने वाला एलर्जिक रिएक्शन है (29)। इसकी मुख्य वजह धूल, पालतू जानवर या दूषित वातावरण से होने वाली एलर्जी है। गर्भावस्था के दौरान इससे निजात पाने के लिए आप कुछ सावधानियां अपना सकती हैं, जैसे –

  • आप उस कारण का पता लगाएं, जिसकी वजह से आपको एलर्जी हो रही है। ऐसा करने से आप बढ़ते परागज बुखार को कम कर सकेंगी और इससे उपचार में भी मदद मिलेगी।
  • आप कुछ दवाइयां ले सकती हैं, इसके लिए आप संबंधित डॉक्टर से संपर्क करें।
  • दूषित वातावरण और पालतू जानवरों से भी दूरी बनाएं,क्योंकि ये भी परागज बुखार के कारण हैं।

क्या गर्भावस्था के दौरान ग्रंथि संबंधी बुखार जोखिम भरा है?

ग्लैंडुलर बुखार, एपस्टीन बार वायरस (EBV) के कारण होने वाला संक्रमण है। इसे संक्रामक मोनोन्यूक्लिओसिस और किसिंग डिजीज भी कहा जाता है। एक बार जब कोई व्यक्ति एपस्टीन बार वायरस की चपेट में आ जाता है, तो यह माना जाता है कि यह वायरस उसके शरीर में जीवनभर रहता है (30)। आमतौर पर यह आगे की बीमारी का कारण नहीं बनता है। गर्भावस्था के दौरान EBV संक्रमण शरीर में दस्तक दे सकता है (31)। इसके आम लक्षण बुखार, गले में खराश और ग्लैंड का फूलना व पेट के नीचे दर्द है। अगर ग्लैंडुलर बुखार के लक्षण दिखाई दें, तो सटीक डॉक्टरी उपचार को प्राथमिकता दें।

गर्भावस्था के दौरान डेंगू बुखार के जोखिम क्या हैं?

डेंगू से होने वाला बुखार गर्भवती महिला को अपनी चपेट में ले सकता है। इस दौरान यह जोखिम भरा हो सकता है। डेंगू की वजह से इस दौरान प्री-एक्लेमप्सिया, प्री-टर्म लेबर, सिजेरियन सेक्शन का जोखिम और फेटल ट्रांसमिशन जैसी जटिलताएं नोट की गई हैं। इसलिए, इससे जुड़ा सटीक डॉक्टरी उपचार बेहद जरूरी है (28)।

आशा है कि गर्भावस्था के दौरान मां-बच्चे पर बुखार के प्रभाव और इससे निजात पाने के विभिन्न घरेलू और डॉक्टरी तरीकों के बारे में आप जान गए होंगे। बुखार की स्थिति में बताई गईं सावधानियों और उपायों पर जरूर ध्यान दें। अच्छा होगा कि आप संबंधित डॉक्टर के परामर्श पर उसके उपचार की प्रक्रिया आगे बढ़ाएं। किसी भी अन्य जानकारी के लिए आप नीचे कमेंट बॉक्स में अपने सवाल पूछ सकते हैं।

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